THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA INDIA AGAINST ITS OWN INDIGENOUS PEOPLES

PalahBiswas On Unique Identity No1.mpg

Monday, March 14, 2016

दो इंच का फर्क भी नहीं है हार और जीत में,फिरभी बंगाल में ममता के मुकाबले विपक्ष की चुनौतियां कम नहीं! विज्ञापित विकास और विकास के लिए निवेश के दावों का सच उजागर हो ही रहा है और धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण से कोई ज्यादा फर्क बंगाल में पड़ने वाला नहीं है क्योंकि बजरंगियों की यहां एकदम चल नहीं रही है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार और संघ परिवार के साथ मधुर संबंध का खुलासा भी कोलकाता और दिल्ली में जनविरोधी राजकाज और केंद्र सरकार के फासिस्ट रवैये के खिलाफ मौकापरस्त मौन और विरोध के मनोरंजक अंतर्विरोधों से उजागर हैं। अल्पसंख्यकों के वोटों के जरिये या बहुसंख्यकों के हिंदुत्वकरण से बंगाल के चुनाव परिणामों पर कुछ ज्यादा असर अबकी दफा होने के आसार नहीं है। एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास


दो इंच का फर्क भी नहीं है हार और जीत में,फिरभी बंगाल में ममता के मुकाबले विपक्ष की चुनौतियां कम नहीं!
विज्ञापित विकास और विकास के लिए निवेश के दावों का सच उजागर हो ही रहा है और धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण से कोई ज्यादा फर्क बंगाल में पड़ने वाला नहीं है क्योंकि बजरंगियों की यहां एकदम चल नहीं रही है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार और संघ परिवार के साथ मधुर संबंध का खुलासा भी कोलकाता और दिल्ली में जनविरोधी राजकाज और केंद्र सरकार के फासिस्ट रवैये के खिलाफ मौकापरस्त मौन और विरोध के मनोरंजक अंतर्विरोधों से उजागर हैं।

अल्पसंख्यकों के वोटों के जरिये या बहुसंख्यकों के हिंदुत्वकरण से बंगाल के चुनाव परिणामों पर कुछ ज्यादा असर अबकी दफा होने के आसार नहीं है।
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
महज दर्जन भर सीटों को छोड़कर बंगाल के 294 सीटों पर कांग्रेस और वाम गठबंधन के साझे उम्मीदवार ममता दीदी के मुकाबले मैदान में होंगे।पहले चरण के मतदान के लिए हर सीट पर एक के मुकाबले एक उम्मीदवार तय है।

गौरतलब है कि पिछले चुनावों में कांग्रेस के वोट दीदी के हक में ही गिरे और जैस जिलों से खबरे आ रही हैं और कार्यकर्ताओं के तेवर हैं और साझा चुनाव प्रचार के रंग हैं,वाम कांग्रेस गठजोड़ का मुकाबला भाजपा के वोट दीदी के खाते में जोड़ भी लें तो भी हार जीत में सिर्फ दो इंच का फर्क है।

बाकी चरणों के लिए कहीं त्रिमुखी लड़ाई न हो,यह कांग्रेस और वमापक्ष सुनिश्चित कर लें तो दीदी की जीत उतनी आसान भी नहीं है।

विज्ञापित विकास और विकास के लिए निवेश के दावों का सच उजागर हो ही रहा है और धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण से कोई ज्यादा फर्क बंगाल में पड़ने वाला नहीं है क्योंकि बजरंगियों की यहां एकदम चल नहीं रही है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार और संघ परिवार के साथ मधुर संबंध का खुलासा भी कोलकाता और दिल्ली में जनविरोधी राजकाज और केंद्र सरकार के फासिस्ट रवैये के खिलाफ मौकापरस्त मौन और विरोध के मनोरंजक अंतर्विरोधों से उजागर हैं।

अल्पसंख्यकों के वोटों के जरिये या बहुसंख्यकों के हिंदुत्वकरण से बंगाल के चुनाव परिणामों पर कुछ ज्यादा असर अबकी दफा होने के आसार नहीं है।

उम्मीदवार में साठ फीसद नये हैं और अल्पसंख्याक भी खूब है,हालाकि महिलाएं कम हैं।इसका फायदा वाम को होना है।

 जमीनी हकीकत के मुताबिक सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की राजनीतिक सदिच्छा का सबूत अगर पेश कर सके वामपंथी नेतृत्व  तो कांग्रेस के साथ समझौते के वैचारिक विवाद के बावजूद कामयाबी के आसार है।

कांग्रेस ने तो इस वैचारिक पहेली को सुलझा ही लिया है। 

कास बात यह है कि कांग्रेस वाम गठबंधन में चुनावी रणनीति और तालमेल बैठाने का काम सोमेन मित्र कर रहे हैं जो हर इलाके की जमीनी परिस्थितियों के मुताबिक मुकाबले को संगठनात्मक तरीके से अमली जामा पहनाने के विशेषज्ञ है और पिछले चुनावों में उनकी इस विशेषज्ञता  का फायदा दीदी को हुआ था।

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Sunday, March 13, 2016

कृषि और गांव को सर्वोच्च प्राथमिकता का मतलब या सलवा जुड़ुम है या फिर आफसा। श्री श्री जलवे की छांव में बजट युद्ध में जनता हारी और लंपट,अय्याश भूत के लंगोट में टंगे हम चूमाचाटी के दर्शक आध्यात्मिक। इस देश में सोनी सोरी होना सबसे मुश्किल काम है!

कृषि और गांव को सर्वोच्च प्राथमिकता का मतलब या सलवा जुड़ुम है या फिर आफसा।

श्री श्री जलवे की छांव में बजट युद्ध में जनता हारी और लंपट,अय्याश भूत के लंगोट में टंगे हम चूमाचाटी के दर्शक आध्यात्मिक।

इस देश में सोनी सोरी होना सबसे मुश्किल काम है!

पलाश विश्वास

हिमांशु कुमार जी का  स्टेटसःसोनी सोरी के बहनोई अजय की बुरी तरह पिटाई करी है ၊ जगदलपुर की सिटी एसपी दीपमाला, बीजापुर का एसपी और सुकमा का एसपी शामिल थे!


सोनी सोरी के बहनोई अजय को पुलिस ने कल रात को छोड़ दिया ၊ अजय को पुलिस नें दो दिन गैरकानूनी हिरासत में रखा ၊ इस दौरान पुलिस ने अजय की बुरी तरह पिटाई करी है ၊ अजय को पीटने वालों में जगदलपुर की सिटी एसपी दीपमाला , बीजापुर का एसपी और सुकमा का एसपी शामिल थे ၊ ये तीनों अधिकारी चाहते थे कि अजय यह स्वीकार कर ले कि सोनी सोरी के चेहरे पर हमला अजय नें लिंगा कोड़ोपी और एक अन्य युवक के साथ मिल कर किया था ၊


पुलिस नें फिलहाल सोनी की छोटी बहन को छोड़ दिया है ၊ लेकिन उसे घमकी दी है कि उसे वे कल फिर ले जायेंगे ၊ पुलिस सोनी के पूरे परिवार को डराना चाहती है ताकि सोनी सरकार के आदिवासियों पर किये जाने वाले जुल्मों के खिलाफ आवाज़ उठाना बन्द कर दे ၊


श्री श्री आध्यात्म और माल्या के ठाठ बाट पलायन,संघी गणवेश इत्यादि के केसरिया राष्ट्रबाद में निष्णात मीडिया ने मुद्दों को बखूब भकाया है इस कदर कि लाखों करोड़ की जिन परियोजनाओं को लेकर नीतिगत विकलांगता के आरोप में नवउदारवाद के मुक्तबाजारी राजसूय के यज्ञ अधिपति खेत हो गये,वे सारी परियोजनाएं सलवा जुड़ुम और आफसा के मार्फत मनसेंटो क्रांति के बुलुट से मेकिंग इन सत्यानाश का चात चौबंद इंतजाम हेतु हरी झंडी है।


मल्टी ब्रांड खुदरा शत प्रतिशत एफडीआी की जिद पूरी हुई और भारत अब परमाणु चूल्हों से लेकर परमाणु रासायनिक हथियारों का अनंत बाजार है।टैक्स सुधार के तहत अरबपतियों के खुली छूट है।


कारपोरेट लूट है।

मंडल कमंडल महाभारत में अपनी अपनी पहचान में कैद लोग बीमा के बाद पेंशन और पीएफ को बी बाजार में जाना मंजूर कर चुके है पीएफ पर टैक्स रोल बैक का जश्न मनाते हुए।


किसानों के बाद बनियों के सत्यानाश के लिए ईकामर्स के लिए  सब्सिडी और जनती की निगरानी के लिए नगद सब्सिडी के बहाने आधार निराधार सर्व सहमति से कानून बनने को तैयार सुप्रीम कोर्ट की खुली अवमानना के बाद।


निर्माण में एकाधिकार पूंजी की घुसपैठ का भी इंतजाम हो गया घर दिलाने के बहाने और स्टार्टअप में तीन साल तक टैक्स नहीं के ऐलान के साथ पुराना सारा कर्ज अरबपतियों के लिए माफ और हम लोग एक अय्याश भूत के लंगोट से लटक गये।


बजट पर चर्चा न हो तो आध्यात्म,वेदपाठ के साथ साथ सार्वजनिक प्रेम वैलेंटाइन का शास्त्रीय मुक्त बाजार मले में राजनीतिक साझा चुल्हा सुलगाया गया कि बजट पर चर्चा होइबे ना करें।


अब मीडिया तय करता है कि हम किस पर सोचे,किस पर बहस करें,किस मुद्दे को लेकर बवाल काटे,किसके खिलाफ फतवा दें,किसे जनादेश दें और किस किस की सुपारी चलें और बुनियादी सारे मुद्दे गायब हो जाये।जबकि अभिव्यक्ति पर कड़ा पहरा है और मौलिक अधिकारोंं की चर्चा देशद्रोह है।


आंदोलन जमीन पर नहीं है ।मीडिया की खबरों में आंदोलन हैं।

खबरों से शुभारंभ और खबरों से अवसान।


अंतहीन बाइट और बेइंतहा धोखाधड़ी क्योंकि हम उनकी राजनीति और उनके आर्थिक एजंडे को समझने की कोशिश ही नहीं करते और हमारे मुद्दे हवा के रुख के साथ सात बदल जाते हैं।


सतह पर हम मेंढक की तरह फुदक रहे हैं अपने अपने कुएं में।बात करते हैं देश दुनिया की और न देश का भूगोल मालूम है और दुनिया का इतिहास।


अपने लोक,अपनी विरासत और अपनी जमीन से कटे कबंधों की न कोई राजनीति होती है और न उनकी अर्थव्यवस्था होती है और मौत की घाटी में तब्दील होता है उनका देश महादेश,जिसमें तमाम बनैले सूअर और सांढ़ एकमुस्त गली मोहल्ले में नंगा नाचें तोहम मान लेते हैं आजादी है,लोकतंत्र का छीछी चैनल है।


वातानुकूलित विद्रोह से जमीन के हालात नहीं बदलेंगे और न कत्लेआम का सिलसिला रुकेगा क्योंकि हर राजनीतिक फैसले से देश बिक रहा है और कातिलो की तलवारे रक्तस्नान कर रही हैं।


अश्वमेधी घोड़ों की खुरों में टंगी हैं तलवारें और नागिरक अब वानरों की फौज हैं।रंग बिरंगे भांति भांति के वानर हैं और जो लोग न राजनीति समझ रहे हैं और न अर्थशास्त्र जड़ोंसे कटे सत्ता के गुलाम खच्चरों और गधों से हम उम्मीद लगाये बैठे हैं कि उनकी कटी हुई जुबान में इंक्लाब के नारे गुंजेंगे।


शुतुरमुर्गों से रेत की आंधियों की मुकाबला की अपेक्षा करते हैं।


अधंरे के सारे जीव जंतु रोशनी का गला घोंट रहे हैं और हर भोर का गर्भपात हो रहा है और हम सिर्फ रीढ़हीन प्रजाति में तब्दील हैं जिनमें मनुष्यता सिर्फ एक जैविकी पहचान है।


कृषि और गांव को सर्वोच्च प्राथमिकता का मतलब या सलवा जुड़ुम है या फिर आफसा।



इसी सिलसिले में गांधीवादी कार्यकर्ता हिमांशु कुमार जी का यह ताजा स्टेटसः

आज एक कानून की पढ़ाई पढ़ने वाली युवती से बातचीत हुई . उसने कहा कि सभी सिपाही थोड़े ही खराब होते हैं . अच्छे भी होते हैं .

मैंने कहा कि सवाल खराब सिपाही और अच्छे सिपाही का नहीं है .

सवाल है सिपाही और सेना ही खराब है .

हम उसका समर्थन नहीं कर सकते .

बात चूंकी छत्तीसगढ़ के संदर्भ में हो रही थी .

इसलिए मैंने पूछा अभी अभी बड़े पैमाने पर सिपाहियों द्वारा आदिवासी महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किये गए .

उस समय अच्छे वाले सिपाही कहाँ चले गए थे ?

सोनी सोरी के गुप्तांगों में पत्थर भरते समय अच्छे सिपाही कहाँ चले गए थे .

छत्तीसगढ़ में सिपाहियों नें साढ़े छह सौ गाँव जला दिए .

इस में सरकार को दो साल लगे .

तब सारे अच्छे सिपाही कहाँ चले गए थे ?

आज सोनी सोरी के साथ रोज़ अत्याचार किया जा रहा है .

क्या छत्तीसगढ़ पुलिस में एक भी अच्छा अधिकारी नहीं है जो कह सके कि मैं भ्रष्ट और क्रूर आईजी कल्लूरी को इस तरह कानून और संविधान की धज्जियां नहीं उड़ाने दूंगा ?

सेना और पुलिस का निर्माण ही व्यापारियों और धनियों की धन की रक्षा के लिए किया गया था .

सीमा पर सेना इसलिए खड़ी हुई है कि गरीब बंगलादेशी भारत में आकर यहाँ के संसाधनों के ऊपर ना जीने लगें

अमेरिका की सीमा की रक्षा इसलिए करी जाती है ताकि दुनिया के गरीब अमेरिका में घुस कर वहाँ की अमीरी में हिस्सा ना बाँट लें .

सेनाएं अमीरों को रोकने के लिए नहीं खड़ी हैं .

अमीर तो हवाई जहाज़ में बैठ कर ठाठ से घुसता है .

अदाणी और मोदी बिना वीजा के पाकिस्तान में घुसे तो कौन सी सेना नें रोक लिया .

कोई गरीब इस तरह घुसकर दिखा दे .

सेना के सिपाही जब बलात्कार करते हैं तो उन् सिपाहियों को बचाने के लिए सरकार वकील खड़े करती है .

सरकार कभी पीड़ित महिला की तरफ से मुकदमा नहीं लड़ती .


ऊधम सिंह ने जलियाँवाला बाग़ के हत्यारे पर आज के ही दिन चलाई थी गोली 
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4 जून 1940 को हिन्दू, मुस्लिम और सिख एकता की नींव रखने वाले 'ऊधम सिंह उर्फ राम मोहम्मद आज़ाद सिंह' को डायर की हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें 'पेंटनविले जेल' में फाँसी दे दी गयी। इस प्रकार यह क्रांतिकारी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में अमर हो गया। 31 जुलाई 1974 को ब्रिटेन ने उनके अवशेष भारत को सौंप दिए थे। ऊधमसिंह की अस्थियाँ सम्मान सहित भारत लायी गईं। उनके गाँव में उनकी समाधि बनी हुई है। जाँबाज वीर को शत शत नमन l

Gopal Rathi's photo.

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Nivedita Menon is a feminist writer and a political and social activist. She is a professor of political thought at Jawaharlal Nehru University, and writes for newspapers, the Economic and Political Weekly and for Kafila.org. She is also the author of Recovering Subversion: Feminist Politics Beyond the Law (2004) and Seeing Like A Feminist(2012). She is also the editor of Gender and Politics in India (1999) and Sexualities (Women Unlimited, 2008).
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ফের ভূমিকম্প! Environmental clearances to 943 projects in 21 months: Javadekar সুন্দরবন রক্ষার দাবিতে ‘জনযাত্রা’ বাগেরহাটে! না মরিয়া কে বা কাহারা বিশ্বাস করিবে যে মরণ কাহারে কয়,সে যেখানে সেখানে আড়ি পেতে রয়! জোট হোক্ বা জট হোক্,মোদ্দা কথা হল বজ্জাতির অন্কেই জয় পরাজয়ের গণতন্ত্র ও ভাটাধিকার মস্তানির মেহেরবানী। সন্ত্রাস ও সহিংস নৈরাজ্যে ভোট উত্সবে যাদের আমরা নির্বাচিত করব,তাঁরা আমাদের প্রতি নয়, করপোরেটে, পিপিতে দায়বদ্ধ।বিদেশী পুঁজি,বিলগ্ণীকরণ লগ্নিতে,বেদখলীর সলোয়া জুড়ুম আফস্পাতে দায়বদ্ধ। শিকড়ের টান যাদের নেই,তাঁদের দায়বদ্ধতায় আস্থা রেখে আমরা ক্রমাগত ধ্বংসের মুখোমুখি। পলাশ বিশ্বাস

ফের ভূমিকম্প! Environmental clearances to 943 projects in 21 months: Javadekar


সুন্দরবন রক্ষার দাবিতে 'জনযাত্রা' বাগেরহাটে!


না মরিয়া কে বা কাহারা বিশ্বাস করিবে যে মরণ কাহারে কয়,সে যেখানে সেখানে আড়ি পেতে রয়!


জোট হোক্ বা জট হোক্,মোদ্দা কথা হল বজ্জাতির অন্কেই জয় পরাজয়ের গণতন্ত্র ও ভাটাধিকার মস্তানির মেহেরবানী।


সন্ত্রাস ও সহিংস নৈরাজ্যে ভোট উত্সবে যাদের আমরা নির্বাচিত করব,তাঁরা আমাদের প্রতি নয়, করপোরেটে, পিপিতে দায়বদ্ধ।বিদেশী পুঁজি,বিলগ্ণীকরণ লগ্নিতে,বেদখলীর সলোয়া জুড়ুম আফস্পাতে দায়বদ্ধ।


শিকড়ের টান যাদের নেই,তাঁদের দায়বদ্ধতায় আস্থা রেখে  আমরা ক্রমাগত ধ্বংসের মুখোমুখি।

পলাশ বিশ্বাস


২৪ ঘণ্টা-১২ মার্চ, ২০১৬ ঃফের ভূমিকম্প। এবার হল জলপাইগুড়িতে। শিনিগুড়িতে, মালবাজারে, আলিপুরদুয়ারেও কম্পন অনুভূত হয়েছে সব জায়গাতেই। দিনের পর দিন বেড়েই চলেছে ভূমিকম্প। প্রায়ই কোনও না কোনও জায়গায় ঘটেছ এমনটা। তাও ভূমিকম্প প্রবণ জায়গায় হলে মানা যায়। কিন্তু এখন যেকোনও জায়গাতেই ভূমিকম্পের খবর প্রায়ই শোনা যাচ্ছে।


ছবি: বাংলানিউজটোয়েন্টিফোর.কম

ছবি: বাংলানিউজটোয়েন্টিফোর.কম


Environmental clearances to 943 projects in 21 months: Javadekar

India has taken measures to discourage use of fossil fuels to reduce carbon footprint'

The Hindu reports:Union Environment Minister Prakash Javadekar on Saturday claimed that in the 21 months of the NDA government at the Centre his Ministry has given environmental clearances to 943 projects, unlocking investments of up to about Rs 6.72 lakh crore.

Mr Javadekar said the NDA government focused on three key principles: make new sustainable development policies, making the process of clearance simpler and more transparent, and decentralising power to the state.

"During the last 10 years (of the UPA government), environment clearances took an average of 600 days. But, the new strategy has helped my ministry cut down the time for various clearances to an average of 190 days. We intend to further improve this to 100 days in the next one year," Mr Javadekar said at a press conference at the BJP headquarters here.

He said during the UPA regime, the time-consuming process of environment clearances for big investment projects had led to delays, stunting growth, increased unemployment, a large number of incomplete projects, and a sharp increase in non performing assets (NPAs) of banks.

"The Environment Ministry had earned the nickname of Roadblock or Speedbreaker Ministry. Our sustainable development policies will increase investment inflow, ensure completion of projects on time, boost employment and development without compromising with environment. We don't just believe in Ease of Doing Business, but Ease of Doing Responsible Business," said the Minister, who, earlier in the day also delivered the keynote address at the 11{+t}{+h}National Convention on Sustainable Development Goals held in Mumbai.

Mr Javadekar told journalists that the Modi government was committed to sustainable development. He said climate change was a reality with one degree of temperature rise caused by 150 years of uncontrolled carbon emissions by the developed world.

He said the US, Europe, and Canada cumulatively contributed 30 per cent of the emissions. Other developed nations accounted for 50 per cent; China alone contributed 10 per cent, whereas India was responsible for only three per cent carbon emission.

He also pointed out that India had taken pro-active measures to discourage use of fossil fuels to reduce its carbon footprint. "The Union Budget 2016-17 has levied a green cess of $6 (Rs 400) per tonne of coal. This is perhaps the highest levy in the world, as even the United States taxes coal at around $1. If the developed world followed India's example and levied higher taxes on coal, billions of dollars would accrue to pursue clean energy programmes" Mr Javadekar said.



NDA govt reduced green nod period to 190 days: Prakash Javadekar

Javadekar added that projects like Sewri-Nhava Sheva Mumbai Trans Harbour Link, many coal mining projects, sewage treatment project for Mula-Mutha river in Pune, two landing of JNPT freight railway and many road projects in the state have received clearances from the ministry.

Sun, 13 Mar 2016-11:10pm , Pune , PTI

Union Minister Prakash Javadekar on Sunday said the NDA government has brought down to 190 days the time taken for obtaining environmental clearance for projects, from the 600 days that it took during the UPA rule.

He said the Centre's aim is to further reduce this period to 100 days. "During the UPA government, the average period for environment clearance was 600 days. However, my ministry has now removed the delay and reduced the period to 190 days. The government wants to further reduce it to 100 days," the Environment Minister said in a press conference here.



ভূমিকম্প আবার। বার বার।

প্রতিবার কাঁপি থর থর।

মাটি ফাটে,পাহাড়ে ধ্বস,তবু বহুতল নাগরিক সভ্যতার হৃদয়ে হেল দোল নেই।

না মরিয়া কে বা কাহারা বিশ্বাস করিবে যে মরণ কাহারে কয়,সে যেখানে সেখানে আড়ি পেতে রয়।


আইএমএফের প্রধান বলেন, বর্তমানে বিশ্ব অর্থনীতি যেসব চ্যালেঞ্জের মুখে রয়েছে, তার মধ্যে অন্যতম হলো এশীয় অর্থনীতির কাঠামোগত সংস্কার। প্রতিযোগিতার সক্ষমতা ও কর্মসংস্থান বৃদ্ধি এবং ভবিষ্যতে অর্থনৈতিক প্রবৃদ্ধি নিশ্চিত করতেই এ সংস্কার কার্যক্রম পরিচালিত হচ্ছে।


এ ক্ষেত্রে উদাহরণ দিয়ে ক্রিস্টিন ল্যাগার্দ চীনের অর্থনীতিতে পুনর্ভারসাম্য প্রতিষ্ঠা, জাপানে করপোরেট সুশাসন-সংক্রান্ত সংস্কার এবং ভারতে কাঠামোগত সংস্কারের কথা উল্লেখ করেন। এ ছাড়া এশিয়ায় ব্যবসায়িক পরিবেশ জোরদার ও বন্ড মার্কেটের উন্নয়ন করা গুরুত্বপূর্ণ বলে মত দেন।

সম্মেলনে নরেন্দ্র মোদি বলেন, 'গণতন্ত্র ও দ্রুত অর্থনৈতিক উন্নয়ন একসঙ্গে চলতে পারে না'—এই পুরাণকথা পুরোনো ধারণাটিকে ভারত ইতিমধ্যে মিথ্যা প্রমাণ করে দিয়েছে।


ভারতের প্রধানমন্ত্রী বলেন, 'আমার ''সংস্কারের মাধ্যমে উত্তরণ" শীর্ষক এজেন্ডা শেষ করতে হবে।'



এরাজ্যে আইন না মানাটাই দস্তুর। সরকারই এব্যাপারটা চায়না। পরিবেশ আইন তো মানাই হয়না। পরিবেশ বিধিকে লঙ্ঘন করে সুন্দরবন ও উপকূলবর্তী এলাকায় দূষন ছড়ানো সংক্রান্ত মামলায় এমনটাই মন্তব্য করেছে জাতীয় পরিবেশ আদালত। উল্লেখ করা যেতে পারে গত বছর 6ই আগষ্ট আদালত একটি রায়ে জানায় সুন্দর বনের গদখালির টুরিষ্ট লজ উপকূল বর্তী আইন ভেঙে তৈরী হওয়ায় ভেঙে ফেলতে হবে।

এবিষয়ে রাজ্যের মুখ্যসচিবকে প্রয়োজনীয় ব্যবস্থা নিতেও নির্দেশ দেওয়া হয়েছে। কিন্তু তা কার্যকর হয়নি।তার উপর গত 14ই অক্টোবর মুখ্যসচিব আদালতে একটি হলফ নামা দিয়ে জানায় ট্যুরিষ্ট লজ না বানিয়ে সেখানে জল রুপান্তর প্ল্যান্ট তৈরী করা হবে। এরই পরি প্রক্ষিতে জাতীয় পরিবেশ আদালত রাজ্য সরকারের প্রতি চরম অসন্তোষ প্রকাশ করে জানায় এরাজ্যে আইন না মানাটাই দস্তুর।



জোট হোক্ বা জট হোক্,মোদ্দা কথা হল বজ্জাতির অন্কেই জয় পরাজয়ের গণতন্ত্র ও ভাটাধিকার মস্তানির মেহেরবানী।


সন্ত্রাস ও সহিংস নৈরাজ্যে ভোট উত্সবে যাদের আমরা নির্বাচিত করব,তাঁরা আমাদের প্রতি নয়, করপোরেটে, পিপিতে দায়বদ্ধ।বিদেশী পুঁজি,বিলগণীকরণ লগ্নিতে,বেদখলীর সলোয়া জুড়ুম আফস্পাতে দায়বদ্ধ।


শিকড়ের টান যাদের নেই,তাঁদের দায়বদ্ধতায় আস্থা রেখে  আমরা ক্রমাগত ধ্বংসের মুখোমুখি।



শিয়রে শমন,তবু হুঁশ নেই কারো।চ্যানেলে প্যানেলে সংবাদপত্রে রাজনীতির ক্লাশ চলছে অবিরাম।


গাজন নেগেছে ভোটের।সব পক্ষই পক্ষ কিংবা প্রতিপক্ষ,সব পক্ষই মনুষত্ব ও প্রকৃতির বিপক্ষ।


গণশত্রুদের রাত দিন প্রবচনে আমাদারে মতামত নির্ধারণ,সমাজ বাস্তব কিংবা প্রকৃতির অশনি সংকেত দেখার চোখ নেই কারো,এমনিই অন্ধ অন্ধকার সময়।


রাজনীতি বোঝে কয় জনা।

কার নাট বল্টু খোলা,কার টাইট,জানে ক

জনা।


জোট হোক্ বা জট হোক্,মোদ্দা কথা হল বজ্জাতির অন্কেই জয় পরাজয়ের গণতন্ত্র ও ভাটাধিকার মস্তানির মেহেরবানী।


সন্ত্রাস ও সহিংস নৈরাজ্যে ভোট উত্সবে যাদের আমরা নির্বাচিত করব,তাঁরা আমাদের প্রতি নয়, করপোরেটে, পিপিতে দায়বদ্ধ।বিদেশী পুঁজি,বিলগণীকরণ লগ্নিতে,বেদখলীর সলোয়া জুড়ুম আফস্পাতে দায়বদ্ধ।


দুটাকার চাল,সাইকেল,কম্বল,ক্লাবে খয়রাত,কাগজে টিভিতে উন্নয়নের বন্যা ও দিকে দিকে কল কারখানা বন্ধ,চা বাগানে মৃত্যু মিছিল,বেকার ছেলেমেয়েদের বিন রাজ্য পলায়ন,রুজু রুটির আয়োজন অন্ধকার জগতের কুটির শিল্প ও নারী স্বাধীনতা বিস্তীর্ণ ধর্ষণ ভূমি মা ভূমি বঙ্গভূমি -ইহাই গণতন্ত্র।


অরাজনৈতিক ফ্যাশনে বুক চাপডে় হুন্কার দিয়ে জনগণের পক্ষে যারা দাঁড়ানোর কথা বলেন ,ঠান্ডি ঘরের সেই শিরদাঁড়া বিহীন শ্বাপদ কুলের বিষ নিশ্বাসে বিষাক্ত আমাদের জীবন জীবিকা এবং তাঁরাই বুঝতে দিতে চায়না প্রতিটি রাজনৈতিক পদক্ষেপই আমাদের,সাধারণ মানুষ ত অবশ্যই,এই পৃথীবী,পরিবেশ এবং প্রকৃতির দশ দিগন্ত সর্বনাশের ছাড়পত্র।


শ্রী শ্রী বৈদিকী মহোত্সবের কল্যাণে বাজেট নিয়ে আলোচনা হলই না।


আধার আইনি হল।প্রোমোটারিতে বড় পুঁজির একচেটিয়া আধিপাত্য হল সস্তায় ঘর পাওয়ার স্বপ্ন দেখিয়ে।


গ্রাম ও কৃষকের কল্যাণে চাষে অবাধ পুঁজির একচেটিয়া সাম্রাজ্য এবং লাখো লাখ কোটি টাকার প্রকল্পে পরিবেশ ছাড়পত্রের দ্বিতীয় মনসেন্টো সবুজ বিপ্লব।


পিএফ এ ট্যাক্সের ক্যারম রিবাউন্ড মারে ট্যাক্স রল ব্যাক হল কিন্তু বিনা প্রতিবাদে বীমার মতি পিএফ ও পেনশন বাজারের ভোগে লাগল।


ন হাজার কোটির চুনা মেরে মাল্যর পলায়নে তার বিলাস বহুল জীবন যাত্রা র কেস্সা কাহিনী নিয়ে মাতামাতিতে আদৌ আলোচনা হল না ট্যাক্স রিফর্মের নামে ই কমার্সে সাবসিডি,স্টার্টআপে তিন বছরের ট্যাক্স হোলি ডে,পুরাতন ট্যাক্স লাখো লাক কোটি মাফ ইত্যাদি খাতে কত মাল্য তৈরি করার মেকিং ইন চলছে।


রাজনৈতিক পদক্ষেপের তাত্পর্য্য নাগরিক জীবনযাত্রায় কি দঃসহ ঘাত প্রতিঘাত সৃষ্টি করছে,বাজারের স্বার্থে সংস্কারের নামে কেমন গণসংহারের অস্বমেধ রাজসূয় - বানর বাহিনীর বোঝার কথা নয় যেহেতু ধর্মোন্মাদি জাতের নামে বজ্জাতির ভোট মেরুকরণে আমরা সবাই লাল নীল সবুজ গৈরিক বানর,.যাদের সমমতির বিবেক নাই,অসম্মতির সাহস নেই।


গণশত্রু শাসকের ক্ষমতা রাষ্ট্র নয় এবং এই ক্ষমতার সিংহাসন থেকে তাঁকে উপড়ে ফেলার স্বাধীনতার নাম গণতন্ত্র,সেটা বোঝার মত রাজনৈতির বোধ আমাদের নেই।তাই শাসকের বিরোধিতা আদ দেশদ্রোহ।


বর্তমানে এশিয়াই বিশ্বের সবচেয়ে গতিশীল অঞ্চল। কাঠামোগত সংস্কারই বৈশ্বিক অর্থনীতিতে চালিকাশক্তি হয়ে উঠেছে এবং এই অঞ্চলের গুরুত্ব বাড়িয়ে দিয়েছে।

আন্তর্জাতিক মুদ্রা তহবিলের (আইএমএফ) মহাপরিচালক ক্রিস্টিন ল্যাগার্দ গতকাল শনিবার ভারতের রাজধানী নয়াদিল্লিতে 'অ্যাডভান্সিং এশিয়া কনফারেন্স' শীর্ষক সম্মেলনে এ কথা বলেন।

ক্রিস্টিন ল্যাগার্দ মনে করেন, বিশ্ব অর্থনীতিতে এশিয়ার হিস্যা বা অংশ ইতিমধ্যে বেড়ে ৪০ শতাংশে উন্নীত হয়েছে। আগামী চার বছরে বিশ্বে যে অর্থনৈতিক প্রবৃদ্ধি অর্জিত হবে, তার দুই-তৃতীয়াংশই আসবে এশিয়া থেকে। 'অপরিহার্য এই অর্থনৈতিক অবদানসহ এশিয়ার সার্বিক গতিময়তার প্রতিই এখন গোটা বিশ্বের আগ্রহ।'

আইএমএফের মহাপরিচালক যখন বক্তব্য দিচ্ছিলেন, তখন মঞ্চে ভারতের প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদিও উপস্থিত ছিলেন।

ক্রিস্টিন ল্যাগার্দ বলেন, আন্তসম্পর্ক ও আন্তসংযোগ বাড়তে থাকায় বিশ্ব অর্থনীতিতে আগের যেকোনো সময়ের চেয়ে এখন এশিয়ার প্রভাব বেশি পড়ছে। আবার এশিয়াতেও অতীতের যেকোনো সময়ের তুলনায় বিশ্ব অর্থনৈতিক উন্নয়নের প্রভাব বেশি লক্ষ করা যাচ্ছে।




গত জানুয়ারিতে আইএমএফ বৈশ্বিক অর্থনীতিতে প্রবৃদ্ধি আগের প্রাক্কলনের চেয়ে কমবে বলে পূর্বাভাস দিয়েছে। একই সঙ্গে সতর্ক করে বলেছে, বিকাশমান বৃহৎ অর্থনীতিগুলো বড় ধরনের ঝুঁকির মুখে রয়েছে।

সংস্থাটির মতে, বিশ্বের দ্বিতীয় বৃহত্তম অর্থনীতি চীনে প্রবৃদ্ধি হ্রাস, মার্কিন ডলারের বিনিময় হার জোরদার, আন্তর্জাতিক বাজারে তেলের দামে ধস ও রাজনৈতিক অস্থিরতা বৈশ্বিক অর্থনীতিকে আরও খারাপের দিকে ঠেলে দিতে পারে।


এদিকে ক্রিস্টিন ল্যাগার্দ ঘোষণা দেন যে আইএমএফের প্রধান দক্ষিণ এশিয়ার জন্য নতুন একটি আঞ্চলিক প্রশিক্ষণ ও কারিগরি সহায়তাকেন্দ্র খুলবে। আইএমএফের প্রধান বলেন, বিশাল যুবশক্তি ও অব্যাহত নীতি-সংস্কারই শুধু ভারতকে সবচেয়ে দ্রুত বিকাশমান অর্থনীতিতে পরিণত করেনি, বরং বিশ্ব অর্থনীতি নিয়ে বিদ্যমান হতাশার মধ্যেও দেশটি তারার মতো আলো ছড়িয়ে যাচ্ছে।


ক্রিস্টিন বলেন, ভারত এখন তার ইতিহাসের এক গুরুত্বপূর্ণ সময়ে দাঁড়িয়ে, যেটির সামনে রয়েছে অর্থনৈতিক উত্তরণের নজিরবিহীন সুযোগ। সংস্কার কার্যক্রমও চলছে। 'মেক ইন ইন্ডিয়া' ও 'ডিজিটাল ইন্ডিয়া' গড়ে তোলার উদ্যোগ বাস্তবায়িত হচ্ছে।


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আজকালের প্রতিবেদনঃআর কারও জন্য না হোক, দিল্লিতে বি জে পি জমানা ঋণখেলাপিদের জন্য '‌অচ্ছে দিন'‌ তো বটেই। সেটাই পরিষ্কার হল রাজ্যসভায় অর্থমন্ত্রী অরুণ জেটলির উত্তরে। এক লিখিত প্রশ্নের উত্তরে জেটলি মঙ্গলবার জানালেন, ২০১৫ সালের মার্চ থেকে ডিসেম্বরের মধ্যে রাষ্ট্রায়ত্ত ব্যাঙ্কগুলির খেলাপি–ঋণ প্রায় ১ লাখ কোটি বেড়ে গেছে। মার্চ মাসে যে অঙ্কটা ছিল ২,৬৭,০৬৫ কোটি, সেটাই ডিসেম্বরে হয়ে গেছে ৩,৬১,৭৩১ কোটি। অর্থাৎ চলতি অর্থবর্ষের প্রথম ৯ মাসেই খেলাপি–ঋণ ৯৪,৬৬৬ কোটি টাকা বেড়ে গেছে। গত বছর মার্চ মাসে সরকারি ব্যাঙ্কগুলির খেলাপি–ঋণ ছিল মোট ঋণের ৫.‌৪৩%‌। ৯ মাস পরে সেই বোঝাই বেড়ে দাঁড়িয়েছে ৭.‌৩০%–এ‌। সরকার অনাদায়ী ঋণ আদায় করতে ডেট রিকভারি ট্রাইবুনাল ৯টি বাড়িয়েছে। এতদিন ছিল ৩৩টি, এখন হয়েছে ৪২টি। তার ফল তেমন কিছুই ভাল হয়নি। অন্য একটি প্রশ্নের উত্তরে অর্থ দপ্তরের রাষ্ট্রমন্ত্রী জয়ন্ত সিনহা জানিয়েছেন, বিশ্ব অর্থনীতির শ্লথ দশার জন্যই নাকি অনাদায়ী ঋণ এমন হু–হু করে বাড়ছে। বস্ত্র, ইঞ্জিনিয়ারিং, চামড়াজাত দ্রব্য ও গয়না প্রস্তুতকারী সংস্থাগুলি রপ্তানি করবে বলে অনেক ঋণ নিয়েছিল। কিন্তু বিশ্ব বাজারের খারাপ দশার জন্য তারা রপ্তানি করতে পারেনি। ঋণও শোধ করতে পারেনি। বেড়ে গেছে সরকারি ব্যাঙ্কের খেলাপি–ঋণ। সিনহা জানান, ৫০০ কোটির ওপর ঋণ নিয়েছে এমন বেশ কিছু অ্যাকাউন্টের মোট ১,৩০,১৬৫ কোটি টাকা ২০১৫ সালের ডিসেম্বরে এন পি এ (‌নন পারফর্মিং অ্যাসেট)‌ ঘোষিত হয়েছে।‌


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আজকালের প্রতিবেদন,দিল্লি: আদালতের নির্দেশ মেনে ক্ষতিপূরণ না দিলেও, যমুনার প্লাবনভূমি পুনর্নির্মানে সাহায্য করবে রবিশঙ্করের সংস্থা '‌আর্ট অফ লিভিং।' শনিবার দিল্লিতে নিজের সাংস্কৃতিক সভায় জানালেন শ্রী শ্রী রবিশঙ্কর। আদালতের নির্দেশেক্ষতিপূরণ প্রসঙ্গে বলেন, সারাজীবন কলঙ্কমুক্তই থেকেছেন তিনি। স্কুলজীবনে কখনও কাউকে এক পয়সা জরিমানা দেন নি। কিন্তু তিনি জানতে পেরেছেন ক্ষতিপূরণ নয়, যমুনাচরের উন্নতির জন্যই ৫ কোটি টাকা চাওয়া হয়েছে। তাই মুক্ত হস্তে সাহায্য করতে প্রস্তুত তাঁর সংস্থা। কিন্তু তিনি মানতে না চাইলেও ন্যাশনাল গ্রিন ট্রাইবুনালের তরফে যমুনা চরকে দূষিত করার অপরাধে রবিশঙ্করের সংস্থাকে ৫ কোটি টাকার ক্ষতিপূরণ দিতেই নির্দেশ দেওয়া হয়েছিল। যার মধ্যে ২৫ লক্ষ টাকা অগ্রিম জমা দিতে বলা হয়। টাকা দিতে অস্বীকার করলে তাঁর বিরুদ্ধে শাস্তিমূলক ব্যবস্থা নেওয়ার কথাও বলে আদালত। এর পরই অগ্রিম তাঁর সংস্থা ২৫ লক্ষ টাকা জমা করার কথা মেনে নেয়। কিন্তু তা সত্ত্বেও সাংস্কৃতিক সভায় ক্ষতিপূরণকে সাহায্যের তকমা দিলেন রবিশঙ্কর।




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আজকালের প্রতিবেদন,দিল্লি: ভারতে কৃষি থেকে আয়কে করের আওতার বাইরে রাখা হয়েছে। এই সুযোগে কর ফাঁকি দিতে অনেকেই অন্যান্য জায়গা থেকে তাঁদের আয়কে কৃষি আয় হিসেবে দেখাচ্ছেন। গজিয়ে উঠছে অজস্র  '‌কোটিপতি'‌ কৃষক। ২৭৪৬টি ব্যক্তি বা সংস্থা পাওয়া গিয়েছে যাঁরা বছরের পর বছর কৃষি থেকে আয়কে এক কোটি টাকার বেশি বলে দাবি করেছেন। মূল্যায়ন বর্ষ ২০১১–'‌১২ থেকে ২০১৩–'‌১৪ এই তিন বছরে সংস্থাগুলোর দাবি খতিয়ে দেখছে এবার কেন্দ্রীয় প্রত্যক্ষ আয়কর বোর্ড (‌সি বি ডি টি)‌। সম্প্রতি পাটনা হাইকোর্টে একটি জনস্বার্থ মামলায় দাবি করা হয়, অনেকেই তাঁদের বেআইনি আয় বা অন্যান্য ক্ষেত্র থেকে আয়কে '‌কৃষি আয়'‌ হিসেবে দেখাচ্ছেন। কালো টাকা এইভাবে সাদা হচ্ছে। এরপরই বিষয়টি নিয়ে সক্রিয় হয় সি বি ডি টি। দেখা যাচ্ছে, মূল্যায়ন বর্ষ ২০০৭–২০০৮ থেকে ২০১৫–'‌১৬ পর্যন্ত এই ব্যক্তি বা সংস্থাগুলো লাভের পরিমাণ এক কোটি টাকার বেশি দেখিয়েছে। তবে ২০১১–'‌১২ থেকে ২০১৩–'‌১৪ পর্যন্ত আয় খতিয়ে দেখা হচ্ছে। অবশ্য, এগুলির প্রত্যেকটিই যে কর ফাঁকির ঘটনা তা নয়, বলছেন আয়কর কর্তারা। অনেক ক্ষেত্রে ডেটা এন্ট্রি করার সময়ও ভুল হয়ে থাকতে পারে। ‌সব দিকই খতিয়ে দেখা হচ্ছে।‌‌



সুন্দরবন রক্ষার দাবিতে 'জনযাত্রা' বাগেরহাটে



বাগেরহাট: সুন্দরবনবিনাশী অভিহিত করে রামপাল বিদ্যুৎ কেন্দ্র বাতিলসহ ৭ দফা দাবিতে তেল-গ্যাস-খনিজ সম্পদ ও বিদ্যুৎ-বন্দর রক্ষা জাতীয় কমিটির 'জনযাত্রা' বাগেরহাট পৌঁছেছে।


রোববার (১৩ মার্চ) বেলা পৌনে ১২টার দিকে জনযাত্রাটি বাগেরহাট শহরের দাসপাড়া এলাকায় পৌঁছায়। সেখানা জেলা কমিটির নেতারা তাদের স্বাগত জানান।


পরে শোভা মিছিল নিয়ে শহর প্রদক্ষিণ করে বেলা সাড়ে ১২টায় বাগেরহাট কেন্দ্রীয় শহীদ মিনারে সুন্দরবন ধ্বংসকারী বিদ্যুৎ কেন্দ্র বাতিলের দাবিতে আয়োজিত পথসভায় শেষে কাটাখালীর উদ্দেশে যাত্রা করে।


এর আগে শনিবার (১২ মার্চ) খুলনার হাদিস পার্কে সমাবেশ করে রোববার সকালে বাগেরহাটের উশেশে যাত্রা করে জাতীয় কমিটি।


জনযাত্রার নেতৃত্বে আছেন- তেল-গ্যাস-খনিজ সম্পদ ও বিদ্যুৎ বন্দর রক্ষা জাতীয় কমিটির অন্যতম নেতা ও ওয়ার্কার্স পার্টির পলিট ব্যুরোর সদস্য বিমল বিশ্বাস, জাতীয় কমিটির সদস্য সচিব আনু মুহাম্মাদ, জাতীয় কমিটির আহ্বায়ক প্রকৌশলী শেখ মুহাম্মদ শহীদুল্লাহ, গণফ্রন্টের সমন্বয়ক টিপু বিশ্বাস, বিপ্লবী ওয়ার্কার্স পার্টির সাধারণ সম্পাদক সাইফুল হক, সিপিবি-বাসদের কেন্দ্রীয় নেতা রুহিন হোসেন প্রিন্স ও গণসংহতি আন্দোলনের প্রধান সমন্বয়ক জোনায়েদ সাকি।


সরকার বাগেরহাটের রামপালে ১ হাজার ৩২০ মেগাওয়াট ক্ষমতার এ বিদ্যুৎ কেন্দ্র নির্মাণে ২০১১ সালে সমঝোতা স্মারকের পর ২০১২ সালের ২৯ জানুয়ারি ভারতের সঙ্গে চুক্তি করে।


'বাংলাদেশ-ইন্ডিয়া ফ্রেন্ডশিপ পাওয়ার কোম্পানি লিমিটেড' নামে এ কেন্দ্রের সমান অংশীদার বাংলাদেশ ও ভারত।


তেলগ্যাস কমিটির সঙ্গে পরিবেশবিদ ও রামপালের বাসিন্দারা প্রথম থেকে বলছেন, কয়লাভিত্তিক এ বিদ্যুৎকেন্দ্র নির্মাণ করা হলে সুন্দরবন হুমকির মুখে পড়বে।


তবে সরকার শুরু থেকেই বলছে, পরিবেশ দুষণ ও প্রতিবেশ যাতে নষ্ট না হয়, সে ব্যাপারে সর্তক থেকেই এটি নির্মাণের উদ্যোগ নেওয়া হয়েছে। ফলে প্রথম থেকেই এই বিদ্যুৎ কেন্দ্র বিরোধীতা করে নানা কর্মসূচি পালন করছে বিভিন্ন সংগঠন।


বৃহস্পতিবার (০৯ মার্চ) সকালে রাজধানী ঢাকার জাতীয় প্রেস ক্লাব প্রাঙ্গণে এক সংক্ষিপ্ত উদ্বোধনী সমাবেশের মাধ্যমে সুন্দরবন অভিমুখে এ 'জনযাত্রা' শুরু হয়।


রোববার (১৩ মার্চ) বাগেরহাটের কাটাখালী মোড়ে সমাপনী সমাবেশ ও জনযাত্রার ঘোষণা পাঠের মধ্য দিয়ে জাতীয় কমিটির চার দিনের এ কর্মসূচি শেষ হবে।


জনযাত্রা ঢাকা থেকে আসার পথে মানিকগঞ্জ, ফরিদপুর, মাগুরা, ঝিনাইদহ, যশোর, খুলনার বিভিন্ন স্থানে সমাবেশ ও জনমত গঠনে পথসভা করে।


এর আগে ২০১৩ সালের সেপ্টেম্বরেও একই দাবিতে সুন্দরবন অভিমুখে লংমার্চ করেছিল তেল-গ্যাস-খনিজ সম্পদ ও বিদ্যুৎ-বন্দর রক্ষা জাতীয় কমিটি।

সুরমা নদীর জন্য সংগ্রামের গান


নিজস্ব প্রতিবেদক, সিলেট


প্রকাশিত: ০১:৫৮ এএম, ১৩ মার্চ ২০১৬, রোববার

সুরমা নদীর জন্য সংগ্রামের গান

একটি শহরকে দুই ভাগ করে দিয়েছে সুরমা নদী। এমন নদী-প্রকৃতি বাংলাদেশে খুব কম শহরে আছে। তাই সিলেট শহরের প্রাকৃতিক সুরক্ষা নদীকে ঘিরে। সুরমা রক্ষায় প্রয়োজনে সংগ্রাম করতে হবে। এমন আহ্বানের মধ্য দিয়ে শুরু হয় 'নদীর জন্য সংগ্রামের গান।'


শনিবার বিকেলে সিলেট নগরের কিনব্রিজের নিচে সুরমা নদীর চাঁদনিঘাটে উন্মুক্ত মঞ্চে নদী-সচেতনতা ও সংগ্রামের গান গেয়ে দর্শণার্থীদের নদী সচেতন হওয়ার আহ্বান জানিয়েছে সিলেটের সাংস্কৃতিক সংগঠন নগরনাট।


সোমবার (১৪ মার্চ) আন্তর্জাতিক নদীকৃত্য দিবস। এ দিবসকে সামনে রেখে 'নদীর জন্য সংগ্রামের গান' শীর্ষক এ অনুষ্ঠানের আয়োজন করেছিল বাংলাদেশ পরিবেশ আন্দোলন (বাপা) সিলেট শাখা ও সুরমা রিভার ওয়াটারকিপার। অনুষ্ঠানটি উৎসর্গ করা হয় গত ৩ মার্চ হন্ডুরাসে দুর্বৃত্তদের হামলায় নিহত নদী সংগ্রামের নেত্রী বেরতা কাসেরেসকে।


অনুষ্ঠানের উদ্বোধনী পর্বে সিলেট সিটি কর্পোরেশনের প্রধান নির্বাহী কর্মকর্তা এনামুল হাবীব বক্তৃতায় নিহত নদী সংগ্রামের নেত্রী বেরতা কারেসকে স্মরণ করে বলেন, এই হত্যাকাণ্ডের প্রতিবাদ থেকে নদী সংগ্রাম পৃথিবীজুড়ে ছড়িয়েছে। তিনি সুরমা নদীকে সিলেট নগরবাসীর জন্য পরম এক সৌভাগ্য উল্লেখ করে বলেন, সুরমা নদী রক্ষা সিলেট শহরকে প্রাকৃতিকভাবে সুরক্ষা করার শামিল। তাই সিলেটবাসীর জন্য নদী রক্ষার সচেতনতা কোনো গোষ্ঠীর নয়, আপামর জনতার।


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এনামুল হাবীব আরও বলেন, সুরমা নদীর পানি থেকেই সিলেটের মানুষের ব্যবহারের জন্য লাখ লাখ ঘন লিটার পানি পরিশোধন করে থাকে সিটি কর্পোরেশন। এই পানি নগরীর লাখো মানুষ বাসা-বাড়ি ও হোটেল-রেস্তরাঁয় ব্যবহার করে থাকেন। তাই আমাদের নিজেদের প্রয়োজনে সুরমা নদীসহ সকল নদ-নদীকে দূষণ বাঁচাতে হবে।


বাপা সিলেটের সাধারণ সম্পাদক ও সুরমা রিভার ওয়াটারকিপার আবদুল করিম কিম আন্তর্জাতিক নদীকৃত্য দিবসকে সামনে রেখে সপ্তাহব্যাপি কর্মসূচি ঘোষণা করেন। এ ঘোষণার শুরুতে তিনি সিলেটে সুরমাসহ বিভিন্ন নদীকেন্দ্রিক ব্যবসা সম্প্রসারণ হওয়ায় দখল ও দূষণের আরেক নতুন কারণ হিসেবে অভিহিত করেন। নদীকেন্দ্রিক ব্যবসাকে পরিবেশ ও নদী দূষণ মুক্ত রাখার আহ্বান জানান তিনি। নদী দূষণ মুক্ত রাখতে সপ্তাহব্যাপি কর্মসূচি ঘোষণা ও  আন্তর্জাতিক নদীকৃত্য দিবসের প্রেক্ষাপট তুলে ধরেন।


বাংলাদেশ পরিবেশ আন্দোলন (বাপা) সিলেট শাখা ও সুরমা রিভার ওয়াটারকিপারের যৌথ এ কর্মসূচিতে বক্তব্য রাখেন দৈনিক সবুজ সিলেট এর ভারপ্রাপ্ত বার্তা সম্পাদক, জাগো নিউজের বিভাগীয় প্রতিনিধি, পরিবেশকর্মী ছামির মাহমুদ, সিলেটের পরিবেশবাদী সংগঠন ভূমিসন্তান বাংলাদেশের সমন্বয়ক মোহাম্মদ আশরাফুল কবীর ও সারী বাঁচাও আন্দোলনের সভাপতি আবদুল হাই আল হাদী।


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আলোচনা পর্বের পরপরই শুরু হয় গান। নগরনাটের সভাপতি অরূপ দাশ ও সাধারণ সম্পাদ উজ্জ্বল চক্রবর্তীর নেতৃত্বে গানের দলের সাতটি পরিবেশনা হয় নদীকে ঘিরে। এরমধ্যে সুন্দরবনের নদীপথ নিয়ে তাদের নিজস্ব গাণ দর্শকদের আপ্লুত করে।


নগরনাটের শিল্পীদের পরিবেশনায় গানে গানে বাংলাদেশের উত্তরপূর্বাঞ্চলের নদী সুরমা ও কুশিয়ারার উজানে বরাক নদীতে ভারত সরকারের জলবিদ্যুৎ প্রকল্পের বাধ, ধলাই, পিয়াইন, সারী গোয়াইন, সোনাইবরদল, মনু, জুড়িসহ প্রভৃতি নদীর দখল-দূষণ অবস্থা তুলে ধরে জনসচেতনতায় প্রতিবাদে এককাট্টা হওয়ার আহ্বান জানানো হয়।


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সপ্তাহব্যাপি কর্মসচি: আন্তর্জাতিক নদীকৃত্য দিবস উপলক্ষে নদী তীরবর্তী এলাকায় আজ রোববার ও কাল সোমবার প্রচারপত্র বিলি এবং সোমবার বিকেলে সিলেট কেন্দ্রীয় শহীদ মিনারে নদী ও পরিবেশ নিয়ে প্রকাশিত সংবাদ, ছবি ও চিত্রাংকন প্রতিযোগিতা।


মঙ্গলবার সুরমা নদীর উৎসমুখ খননের দাবিতে কাজীরবাজার সেতুর ওপর অবস্থান কর্মসূচি। বুধবার সচেতনতা কার্যক্রম ও শেষ দিন ১৭ মার্চ সুরমা নদীর তীরে ১০ কিলোমিটার এলাকাজুড়ে বাইসাইকেল র‌্যালি।


ছামির মাহমুদ/বিএ

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নদী তুমি কার, হিন্দু না মুসলমানের?

প্রকাশিত: ২০১৬-০৩-১৩ ১৭:৪১:১০


বিনোদন ডেস্ক:

গেল বছরে মুক্তিপ্রাপ্ত কলকাতার মেধাবী নির্মাতা সৃজিত মূখার্জীর 'রাজকাহিনী'র পর ফের দেশভাগকে প্রসঙ্গ করে নতুন গল্পের সিনেমা নিয়ে আসছেন কলকাতার আরেক গুণী নির্মাতা গৌতম ঘোষ। দুই বাংলার যৌথ নির্মাণে অসাধারণ সিনেমা 'মনের মানুষ'-এরপর যৌথ নির্মাণে ফের আরো একটি অসাধারণ প্রয়াস হতে যাচ্ছে ছবি 'শঙ্খচিল'। দেশভাগের গল্প নিয়ে নির্মিত দুই বাংলার যৌথ উদ্যোগে নির্মিত আলোচিত এই ছবিটির ট্রেলার রিলিজ হয়েছে আজ দুপুরে।


প্রথমবারের মত 'শঙ্খচিল'-এর ফেসবুক পেইজে রিলিজ দেয়া হল প্রতীক্ষিত ট্রেলারটি। মাত্র তিন মিনিট ১৫ সেকেন্ডের ট্রেলারে ফুটে উঠে দেশ ভাগের এক মর্মান্তিক গল্প। এক ভূগোল মাস্টারের জীবন, পরিবার, তার স্ত্রী, একমাত্র মেয়ে এবং তার আশপাশের পরিবেশকে কেন্দ্র করে ঘূর্ণায়মান 'শঙ্খচিল'-এর বিস্তার। বাংলাদেশ-ভারত সীমান্তের এক জনপদের গল্প 'শঙ্খচিল'।


যার মাঝখান দিয়ে বয়ে গেছে একটি নদী। কিন্তু বুড়ো খুকুদের ইশারায় হিন্দু-মুসলিমের মধ্যে যখন দাঙ্গা তুঙ্গে। তখন পারাপার হতে হয় সাধারণ মানুষদের। হিন্দুরা বাংলাদেশ ছেড়ে নদী পাড় হয়ে কাঁটাতার ডিঙিয়ে ভারতে আর ভারতের সাধারণ মুসলমানরা নিজের ভিটেমাটি ছেড়ে একইভাবে নিরাপদ আশ্রয়ের সন্ধানে বাংলাদেশে আসে। কিন্তু এমন পারাপার মেনে নিতে পারে না ভূগোলের মাস্টার। কেঁদে উঠে তার মন। এমনকি তার মেয়েও নিজের দেশ ছেড়ে যখন কোনোভাবেই যেতে চাইছে না, তখন নদীকে উদ্দেশ্য করে হৃদয়ে রক্তক্ষরণ নিয়ে ভূগোল মাস্টারের প্রশ্ন, 'নদী তুমি কার, হিন্দু না মুসলমানের?'  


বিষণ্ন মাস্টারকে শেষ দিকে এসে গম্ভীর ভঙিতে যখন আবৃত্তি করতে শোনা যায় যে, তেলের শিশি ভাঙল বলে/ খুকুর পরে রাগ করো/তোমরা যে সব বুড়ো খোকা/ ভারত ভেঙে ভাগ করো!/তার বেলা?' তখন তার ভেতরের ক্ষতটা দর্শক মাত্রই ছুঁয়ে যায়।   


ট্রেলারে দেশভাগের গল্পের ভেতর দিয়ে সাধারণ মানুষের দেশ প্রেমের যে চিত্র নির্মাতা গৌতম ঘোষ ফুটিয়ে তুলেছেন, তা সন্দেহাতীতভাবে দুই বাংলার মানুষকেই 'শঙ্খচিল' ছবিটি দেখতে কৌতুহলি করে তুলবে। অন্যদিকে প্রথমবার ফেসবুক পেইজে ট্রেলার প্রকাশ করে ছবির কেন্দ্রীয় চরিত্রে অভিনয় করা কলকাতার জনপ্রিয় অভিনেতা প্রসনেজিৎ বলেন, গৌতম দা'র 'মনের মানুষ'-এ নিজের সর্বোচ্চটা দিয়ে অভিনয় করার চেষ্টা করেছি। মনের মানুষের পর তাঁর 'শঙ্খচিল'-এ অভিনয় করলাম। এখানেও আমার সর্বোচ্চ অভিনয়টা দেয়ার চেষ্টা করেছি। মনের মানুষ দুই বাংলার মানুষ যেভাবে গ্রহণ করেছিল আশা করছি এই ছবিটিও সেভাবেই গ্রহণ করবেন। ট্রেলারটির পর সবাই আমাকে ফিডব্যাকটা জানাবে। ভালো হলেও, মন্দ হলেও।


উল্লেখ্য, বাংলাদেশ থেকে এই ছবির প্রযোজনা করছে ইমপ্রেস টেলিফিল্ম এবং এর পরিবেশক সংস্থা আশীর্বাদ চলচ্চিত্র। ভারতে ছবিটির প্রযোজনা প্রতিষ্ঠান হিসেবে থাকছে প্রসেনজিতের প্রযোজনা সংস্থা। গেলো বছরের মার্চে 'শঙ্খচিল' এর দৃশ্যধারণের কাজ শুরু করে জুলাইয়ে শেষ করেন পরিচালক গৌতম ঘোষ। এর পরপরই শুরু হয় সম্পাদনা ও ডাবিং এর কাজ। এরমধ্যে ভারত ও বাংলাদেশ থেকে মিলেছে ছবিটি প্রদর্শনের ছাড়পত্র। প্রসেনজিৎ ছাড়াও এই ছবিতে অভিনয় করেছেন বাংলাদেশের জনপ্রিয় অভিনেত্রী কুসুম শিকদার, মামুনুর রশীদ, শাহেদ আলী, রোজী সিদ্দিকীসহ অনেকে। আসছে পহেলা বৈশাখ দুই দেশের প্রেক্ষাগৃহে মুক্তি পেতে যাচ্ছে 'শঙ্খচিল'।



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