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THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA INDIA AGAINST ITS OWN INDIGENOUS PEOPLES

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Thursday, May 17, 2012

पच्चीस करोड़ का विज्ञापन देकर मनाया सरकार का सालगिरह

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पच्चीस करोड़ का विज्ञापन देकर मनाया सरकार का सालगिरह

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पच्चीस करोड़ का विज्ञापन देकर मनाया सरकार का सालगिरह

16 मई का दिन राजा की रिहाई के बाद भी डीएमके के लिए जश्न मनाने का दिन हो या न हो लेकिन तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने इस दिन को धूमधाम से मनाया. उनके सरकार के एक साल पूरा होने के इस धूमधाम की धमक राजधानी दिल्ली में भी दिखाई दी. राजधानी के सभी प्रमुख अंग्रेजी अखबारों का कवर मुंहमांगी कीमत देकर खरीद लिया. केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के लगभग सभी अंग्रेजी अखबारों के फ्रंट और बैक कवर जयललिता के गुणगान से पटे रहे.

देश के करीब-करीब सभी प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्रों के 16 मई, 2012 के अंक में मुख्य पृष्ठ पर जया ही छाई हैं। कुछ अखबारों में चार पेज के भी विज्ञापन दिए गए हैं। अंग्रेजी अखबारों के पहले पेज पर जया की आदमकद फोटो के साथ वन ईयर ऑफ एचीवमेंट्स : हंड्रेड ईयर्स लीप फारवर्ड की कैच लाइन भी है। सूत्रों के अनुसार इस विज्ञापन अभियान के लिए 25 करोड़ का बजट तय किया गया था। कई समाचार पत्रों में जयललिता को उनके चुनावी वादों जैसे चावल के मुफ्त वितरण, मिक्सर ग्राइंडर्स, गायें-बकरियां और बेटी की शादी के लिए मंगलसूत्र देते हुए चित्रों को भी दर्शाया गया है। विज्ञापनों के माध्यम से जयललिता ने यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि केंद्र सरकार गैर कांग्रेसी राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

चूंकि जयललिता सरकार ने अपनी उपलब्धियों का बखान करने वाले विज्ञापन चेन्नई के साथ-साथ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलूर के भी अंग्रेजी अखबारों में दिए हैं इसलिए यह माना जा रहा है कि वह खुद को राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभारना चाहती हैं। एक साथ इतनी बड़ी राशि विज्ञापन पर खर्च करने के मामले में जयललिता ने कई बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। 2007 में वोडाफोन ने जब भारत में कदम रखा था तो उसने एक दिन में मीडिया कवरेज पर दस करोड़ रुपये खर्च किए थे।

जयललिता के इस कदम पर द्रमुक प्रमुख करुणानिधि की बेटी कनिमोझी ने कहा है कि ऐसे विज्ञापन तो तब जारी किए जाने चाहिए जब आपने कुछ हासिल किया हो। मुझे समझ नहीं आया कि जयललिता ने एक साल में क्या हासिल किया है? भाकपा नेता गुरुदास गुप्ता के अनुसार, यह संसाधनों की बर्बादी के अलावा और कुछ नहीं।

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