THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA INDIA AGAINST ITS OWN INDIGENOUS PEOPLES

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Sunday, August 4, 2013

फिर बस मालिक आंदोलन की राह पर

फिर बस मालिक आंदोलन की राह पर


परिवहन क्षेत्र में लगातार अघोषित हड़ताल का माहौल बन गया है।बसें लगातार कम होती जा रही है।किसी भी रुट को ले लीजिये,बस सेवा कोलकाता महानगर और उपनगरों में फिलहाल अनियमित है और इसके सुधरने के आसार कम ही हैं।


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​

सोमवार को राज्यके परिवहन मंत्री से मुलाकात करने वाले हैं निजी बसमालिकों के प्रतिनिधि।तेल की कीमत में किश्त दर किश्त बढ़ोतरी से उनके लिए बसें चलाना बिन बाड़ा बढ़ाये अब कतई संभव नहीं है,ऐसा वे मंत्री को बतायेंगे।मंत्री ने उनकी समस्या सुलझाने की पहल नहीं की तो उनके सामने आंदोलन के अलावा कोई चारा नहीं है।ज्वाइंट काउंसिल आफ बस सिंडिकेट का यह फैसला है। सिंडिकेट के मुताबिक रुपया लगातार गिर रहा है और तेल की कीमतें लगातर बढ़ रही हैं। चालीस फीसद बसें सड़कों पर उतर ही नहीं पा रही हैं। झो उतर रही हैं, वे घाटे पर चल रही हैं।बस मालिकों के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री दीदी के दरबार में भी हाजिरी लगायेंगे।


अब भी गाहे बगाहे कोलकाता और उपनगरों में बस गायब हो जाती है।व्यस्त आफिस टाइम हो या रात के आठ बजे,बसें जब तब गायब होजाती हैं।नित्ययात्रियों के लिए घर से दफ्तर और दफ्तर से घर पहुंचना बहुत मुश्किल हो गया है।हड़ताल ेक दो दिन के लिए हो या अनिश्चितकाल के लिए,वह घोषित होने से वैकल्पिर रास्ते यात्री झकख मारकर निकाल ही लेते हैं।लेकिन परिवहन क्षेत्र में लगातार अघोषित हड़ताल का माहौल बन गया है।बसें लगातार कम होती जा रही है।किसी भी रुट को ले लीजिये,बस सेवा कोलकाता महानगर और उपनगरों में फिलहाल अनियमित है और इसके सुधरने के आसार कम ही हैं।


सिंडिकेट की मांग है कि अविलंब बसभाड़ा बढ़ा दिया जाये और जाहिर है कि राज्य सरकार फिलहाल इसके लिए कतई तैयार नहीं है। राज्य के बस मालिकों ने किराया बढ़ाने की मांग को लेकर फिर हड़ताल करने की धमकी दी है।शनिवार को बस मालिकों की विभिन्न यूनियनों की बैठक हुई, जिसमें सात या आठ अगस्त को बसें बंद रखने काफैसला किया गया है। सिंडिकेट कीबैठक के बाद संगठन की ओर से युग्म सचिव तपन बंद्योपाध्याय ने परिवहन मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलने का कार्यक्रम बताते हुए चेतावनी दी कि भाड़ा नहीं बढ़ तो अंतिम हथियार आजमाना ही पड़ेगा।


सिंडिकेट का कहना है कि अंतिम बार बस भाड़ा अक्तूबर 2012 में बढ़ाया गया,जो पर्याप्त नहीं था।लेकिन बसमालिकों ने जनता और सरकार के साथ पूरा सहयोग किया है। जबकि तबसे लेकर अब तक नौ दफा डीजल की कीमतों में इजाफा हो गया है।भाड़ा वही है।सिंडिकेट के महासचिव साधन दास ने कहा कि जिस प्रकार से डीजल कीकीमतों में बढ़ोतरी हुई है, वैसी स्थिति में बस का किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है। बस मालिक संगठनों ने सातरुपये न्यूनतम किराया करने की मांग की है। हालांकि इस संबंध में राज्य के परिवहन मंत्री ने शनिवार को हीसाफ कर दिया कि फिलहाल बस किराये में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की जा सकती है।


बसों की कमी के बारे में परिवहन मंत्री की सफाई है कि बसों को राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनावों के काम में लगाया और उसके बाद मौसम की वजह से बसे पर्याप्त संख्या में सड़कों पर उतरी नहीं है।उन्होंने उम्मीद जतायी है कि हालात जल्दी ही सामान्य हो जायेंगे।इसके विपरीत बसमालिकों का कहना है कि बसें भाड़ा न बढ़ने से घाटे में चल रही हैं और घाटे पर बसें सड़कों पर उतारना अब उनके लिए संभव नहीं है।






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