THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA INDIA AGAINST ITS OWN INDIGENOUS PEOPLES

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Saturday, February 16, 2013

भारत के प्रधान न्यायाधीश कानून के पेशे के गिरते स्तर से चिंतित


भारत के प्रधान न्यायाधीश कानून के पेशे के गिरते स्तर से चिंतित
Saturday, 16 February 2013 15:39

नयी दिल्ली (भाषा)। भारत के प्रधान न्यायाधीश अलतमस कबीर ने देश में कानून से जुड़े पेशे के गिरते स्तर पर आज चिंता जाहिर की और कहा कि इसमें मौजूद खामियों को दुरूस्त किए जाने की जरूरत है। बार कौंसिल आफ इंडिया के स्वर्ण जयंती समारोह में प्रधान न्यायाधीश ने कहा, '' हमने अपने लिए जो मापदंड तय किए थे, उन पर जरा गौर कीजिए। हम उन्हें बनाए रखने में कहां तक सफल हुए ? 50 सालों में हम इन मापदंडों को इन मूल्यों को कहां तक निभा पाए ? गिरते मापदंडों के कई कारण हो सकते हैं ।''
उन्होंने कहा, '' कई बार वकील अदालत के मामलों के दौरान पूरी तरह से तैयार नहीं होते और इन कमजोरियों को दुरूस्त किए जाने की जरूरत है । शिष्टाचार और सभ्य आचरण बहुत मायने रखते हैं ।''

इस मौके पर अटार्नी जनरल जी ई वहानवती ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने के दौरान निचली अदालतों और उच्च अदालतों के वकीलों के बीच के भेद को मिटाने की जरूरत है ।''
उन्होंने कहा, '' हमें बार की विविधता को स्वीकार करना होगा। हालांकि अधिवक्ता अधिनियम वरिष्ठ अधिवक्ताओं के पद का प्रावधान करता है । लेकिन लगता है कि इसे केवल उच्च अदालतों में प्रैक्टिस करने वालों के लिए ही आरक्षित रखा गया है । ''
वहानवती ने कहा, '' अगर ऐसा है तो जिला अदालतों के प्रतिभावान वकीलों के योगदान को मान्यता क्यों नहीं दी जाती जो कि अन्य वरिष्ठ वकीलों से बेहतर नहीं तो उनसे कम भी नहीं हैं और उनके ही बराबर की योग्यता रखते हैं ।''


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