THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA

THE HIMALAYAN TALK: PALASH BISWAS TALKS AGAINST CASTEIST HEGEMONY IN SOUTH ASIA INDIA AGAINST ITS OWN INDIGENOUS PEOPLES

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Wednesday, May 16, 2012

अमरीकी गुलामी – असर शुरु

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अमरीकी गुलामी – असर शुरु

अमरीकी गुलामी – असर शुरु

By  | May 16, 2012 at 8:18 pm | No comments | आस-पड़ोस/सरहद | Tags: ,

रणधीर सिंह सुमन

अहमदीनेजाद

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी हिंदुस्तान यात्रा पर आई थी और उन्होंने भारतीय संघवाद के विपरीत आचरण प्रदर्शित करते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सीधे मुलाकात की और अमेरिकी एजेंडे को संसद में पास कराने के लिये विचार विमर्श किया। उस में मुख्य रूप से यह बात भी शामिल थी कि भारत ईरान से पेट्रोलियम पदार्थों को न ख़रीदे। भारतीय राजनेताओं नागरिकों राजदूतों की जिस तरह से बेइज्जती तलाशी के नाम पर अमेरिकी हवाई अड्डों पर होती है। उसका कोई भी जवाब भारत सरकार नहीं दे पाती है उलटे अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी ने भारतीय संघ की परवाह न करके सीधे बंगाल की मुख्यमंत्री से सम्बन्ध कायम करने की कोशिश की अमेरिकी दबाव के बीच भारत ने मंगलवार को स्वीकार किया कि उसने ईरान से कच्चे तेल के आयात में बड़े पैमाने पर कटौती की है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री आर पी एन सिंह ने कहा कि 2010-11 और 2011-12 के दौरान भारतीय तेल कंपनियों ने ईरान से 18.5 एमएमटी और 17.44 एमएमटी कच्चे तेल का आयात किया। उन्होंने बताया कि 2012-13 में ईरान से 15.5 एमएमटी कच्चे तेल का आयात किया जाना है। सिंह ने धर्मेद्र प्रधान के सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी।
ईरान द्वारा रुपये में पेमेन्ट लेने में हम इस जिम्मेवारी से मुक्त हो जाते हैं। तेल के लिये मिले रुपयों से ईरान कपड़े, अनाज अथवा अन्य दूसरा माल भारत से खरीद सकता है। यह सौदा भारत के लिये लाभप्रद है।

रणधीर सिंह सुमन लेखक हस्तक्षेप.कॉम के सह सम्पादक हैं

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